क्या माँ का दूध शेयर किया जा सकता है? Breast milk sharing

यह तो बहुत ही ज़रूरी और ऐसा सवाल है जिसके बारे में बहुत कम लोग ही शायद बात करते हैं। शायद इसके पीछे धारणा यह है कि माँ का दूध तो माँ का दूध होता है, इसको शेयर करने में किसी को क्या परेशानी हो सकती है। इसके उल्टा, अपना दूध दान करना, शेयर करने से कई गलत धारणा जुड़ी हुई हैं जिनके मुताबिक़ इसको सही नहीं माना जाता है।

यह बात तो हम सभी मानते हैं ना कि, माँ का दूध मां का दूध होता है। WHO- वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन, नवजातों के स्वास्थ्य और पोषण की नजर से, कम से कम पहले 6 महीने तक मां का दूध ही बच्चों को देने की सलाह देता है। वहीँ यह संभव ना होने पर दूसरा विकल्प “इंसान का दूध-डोनर की मदद से लेने का समर्थन करता है। कई मामलों में यह विकल्प कई नवजात बच्चों की जिंदगी के लिए वरदान साबित हुआ है।

अनौपचारिक विकल्प में, तो आपने अक्सर घरों में, दोस्तों के ग्रुप में, या गली मोहल्लों में भी, शेयरिंग स्तनपान का चलन या कह लीजिए प्रैक्टिस बहुत ही आम होते हुये देखी होगी, अभी भी यह चलन में ही है। लेकिन इस प्रैक्टिस से जुड़ी हुई कुछ जरूरी बातें समझ लेना बहुत जरूरी है।

अगर आप किसी भी निजी कारण के चलते, किसी भरोसेमंद से अपने बच्चें के लिए ब्रेस्ट मिल्क लेना चाहते हैं तो इन बातों का ध्यान रख सकते है :

1) अगर दूध बिना पंप किये सीधा पिलाया जा रहा रहा है तो, इससे पहले और बाद में भी ब्रेस्ट को साफ कर लेना ज़रूरी है। जिससे किसी भी संक्रमण को अवॉयड किया जा सके।

2) दूध पिलाने वाली महिला किसी तरह का नशा नहीं कर रही हैं, स्मोकिंग नहीं कर रही हैं, या किसी ऐसी दवाई को नहीं ले रही हैं जो ब्रैस्टफ़ीडिंग के दौरान डॉक्टर्स नहीं लेने की सलाह देते हैं।

3) आपकी जानकारी के लिए माँ के दूध से भी बच्चें को संक्रमण/बीमारियां पास होने की सम्भावना हों सकती है। जैसे-HIV संक्रमण या और दूसरे संक्रमण। जो पता करना इतना आसान नहीं लिए, क्यूंकि हो सकता है कि ख़ुद महिला को ही इन बीमारियों के बारे में जानकारी नहीं हो।

4) एक और बात जो नैतिकता से जुड़ी हुई है वो यह कि महिला अगर अपने बच्चे को भी दूध पिला रही है, ख़ास तौर से अगर वो उनके दूध पर निर्भर करता है, आपके साथ शेयर करने से उनका बच्चा तो भूखा नहीं रह जाएगा, या वो यह किसी दवाब में तो नही कर रही हैं इस इस बारे में भी पहले से ही, अपने पास एक स्पष्टता रखिये।

अब बात करते हैं फॉर्मल यानी औपचारिक ब्रेस्ट मिल्क शेयरिंग के बारे में:

यह वो “ग्रुप्स, संस्थायें हैं जो “इंसानी मिल्क बैंक का श्रोत” बनकर काम करती हैं। इसके बारे में जागरूकता अभियान चलाती हैं, और महिलाओं को सामाजिक कार्य की नज़र से ऐसा करने के लिए प्रोत्साहित करती हैं। आपको पता है ‘एशिया’ का सबसे पहला मिल्क बैंक भारत-मुंबई में 1986 में ही खुल गया था?

अब,अगर आप इस विकल्प के बारे में सोच रहे हैं या खोज रहे हैं तो इसके लिए अपने अस्पताल, किसी रजिस्टर्ड ” मिल्क बैंक” से ही कांटेक्ट कीजिए। और किसी भी ऑनलाइन मिल्क सप्लायर से इसे खरीदना अवॉयड करें, कई सुरक्षाओं को ध्यान में रखते हुए एक्सपोर्ट ऐसा करने की सलाह नहीं देते हैं?

रजिस्टर्ड मिल्क बैंक, डोनर के स्वास्थ्य से जुड़ी सभी बातों के बारे में सतर्क रहती है, दूध को सप्लाई करने से पहले उसे पास्चुराइज़् यानि बेक्टिरिया को हटाने की प्रक्रिया से गुज़ारती है।

इसकी कीमत, उपलब्धता के बारे में भी अच्छे से पता कर लीजिए। क्यूंकि यह सबसे ज़्यादा ज़रूरत वाले नवजात के आधार पर ही उपलब्ध हों सकता है।

आखिर, में आप यह ध्यान में रख सकते हैं कि फार्मूला मिलक्स भी एक अच्छा और सुरक्षित विकल्प है। इसके बारे में भी अपने डॉक्टर से सलाह ले लीजिये।

कोई और सवाल जो आप पूछना चाहते हैं, तो नीचे लिखिये। ज़्यादा डिमांड वाले सवाल पर जल्दी ही नया लेख पब्लिश हो जायेगा।

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