माँ का फ़ोन आया

मेरी माँ जो कभी स्कूल नहीं गईं लेकिन हर नयी चीज़ को सीखने कि उत्सुकता उनमें उतनी ही होती है जितनी किसी छोटे बच्चे में।

तो 2015 में हर किसी हाथ में टच वाले मोबाइल आम हो गए, घर में ही हम में से अधिकतर लोगों के पास मोबइल आ चुके थे। माँ हमारे फ़ोन को एक टुक देखती रहती, फिर अपने कीपेड वाले मोबाइल को देखते-देखते एक दिन उन्होंने एलान किया कि

“हमको भी टच फ़ोन लाकर दो” पिताजी ख़ूब हसे, और उन्होंने कहा नहीं भाई हम तो कीपेड ही चलाएंगे। और तुम कहाँ चला पाओगी यह टच-वच।

मम्मी ने फिर ज़िद कि तो घर के दूसरे पुरुषों ने उन्हें “टेक्नोलॉजी पर भारी ज्ञान” देते हुए ख़ूब सुनाया और कीपेड से ख़ुश रहने को कहा।

उन दिनों mother’s day आस-पास था और मैंने मेरी तनख्वाह से उनके लिए शायद 5000 की कीमत वाला एक बढियाँ सा चाइनीज़ मोबाइल लिया और उन्हें धप्पा किया।

शायद मेरे पास शब्द होते यह बताने के लिए वो कितनी इमोशनल और ख़ुश हो गई थी यह सुनकर कि यह मोबाइल उनका है।

हाहाहाहा, बिलकुल बच्चों की तरह 2 दिन उस मोबाइल से चिपके रहने के बाद मम्मीजी एक दम प्रो हो चुकी थी।

फिर क्या सबको व्हाट्सएप्प पर लें इधर से फॉरवर्ड लें उधर फॉरवर्ड, जल्दी वॉइस से टाइप भी करने लगी और जैसे बताने लगीं “आजाओ टेक्नोलॉजी के गुरुओं मैं तुम्हें बताती हूँ। मैं भी अम्मा हूँ तुम्हारी।

मम्मी का कीपेड फ़ोन, कई बार कहता जैसे “हमको पराया कई दिया ना अम्मा “

Mummy and me year 2015

2021, अब वो चाइनीज़ फ़ोन कहाँ है?

आज 2021 में उनके पास एक बढियाँ ब्रांड का बढियाँ सा टच फ़ोन है, लेकिन वो चाइनीज़ फ़ोन उनकी जान है और सलामत जैसे एक दम नया हो उनकी अलमारी में रखा है।

कई बार सबने, मैंने भी कहा की लाओ अब वो फ़ोन दे दो, क्या करोगी ख़राब हो जाएगा। लेकिन वो “नहीं हम वो फ़ोन किसी को कभी नहीं देंगे, किसी कीमत पर नहीं”

आपको बता दूँ कि पिताजी के ने सिर्फ हाल ही में कीपेड से पुराने ज़माने का टच शुरू किया है वो भी मज़बूरी में।

यह मेरी कहानी है। क्या आपके पास भी हैं ऐसी कहानियाँ ? तो यहाँ सबमिट कीजिए न: Submit your story

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