मंदिरा बेदी की बेटी तारा मुझे भी कुछ याद दिलाती है।

Mandira bedi adopted daughter Tara -Slams troll on Instagram

मंदिरा बेदी और उनके पति राज कौशल ने पिछले साल जुलाई में एक लड़की को गोद लिया था, और उसे बहुत ही प्यारा नाम तारा बेदी कौशल दिया। किसी भी माँ की तरह मंदिरा भी अपने बच्चों से बहुत प्यार करती है, जिसका सबूत लोगों को तब मिला जब इंस्टाग्राम पर एक यूज़र-ट्रोलर ने तारा पर भद्दी टिप्पणी की, मंदिरा ने इसके जवाब में वही किया जो कोई भी गुस्से में बौखलाई माँ करती। मंदिरा ने ट्रोलर के कम्मेंट का स्क्रीनशॉट लिया उसे अपनी स्टोरी में लोगों के साथ साझा किया- जिसमें मंदिरा ने कहा कि “इस तरह के लोगों को स्पेशल अटेंशन मिलना ही चाहिए और तुम्हे मेरा अटेंशन मिल गया-घटिया इंसान”

असल में, ट्रोलर ने मंदिरा की बेटी तारा की तस्वीर पर कमेंट किया था कि “मैडम आपने अपनी बेटी को किस बस्ती/स्लम से अडॉप्ट किया है” क्यूंकि ट्रोलर भाई साहब को तारा के रंग/रूप से खासा समस्या हुई होगी कि गहरे रंग वाली, सामान्य सी दिखने वाली बच्ची इतनी बड़ी सख्सियत तक कैसे पहुँच गई। बस उसी भड़ास को निकालने के लिए ट्रोलर जी ने एक छोटी बच्ची और एक परिवार को टारगेट किया वो भी सोशल मीडिया के मुखोटे में छुपकर। क्यूंकि यह तरीका इनको सैफ लगता है कि बस किसी को भी शब्दों के पथर मार के छुप जायेंगे कोई क्या ही बिगाड़ लेगा। इन्हे कौन बताये ऐसी सोच और हरकते लेकर यह बिगाड़ रहे हैं अपना इस समाज का और कहीं ना कहीं अपने परिवार का।

ख़ैर, सामान्य रंग और रूप वाले बच्चें को गोद लेने और जन्म देनें को ताने यह दुनियाँ तो जब सोशल मीडिया नहीं था तब भी होता था वो भी मुँह पर। अपना दुखड़ा नहीं रो रही बस इससे जुड़ी हकीकत बता रही हूँ। मेरी माँ क्यूंकि गोरे रंग की हैं, और मैं गहरे रंग की बचपन में दिखने में बिल्कुल प्यारी तारा जैसी। मम्मी के साथ जब भी कहीं आती जाती थी लोगों को मैं उनके मुंह पर यह कहते हुए सुनती थी ” सरिता यह लड़की तुम्हारी है, यह तुम्हारी तरह तो लगती ही नहीं” मेरे भाई बहन भी मेरे साथ मजाक करते हुए कहते थे तुझे तो मम्मी पापा कचरे की गाड़ी से लाए थे- हां मैं आपकी बात समझ रही हूं कि यह मजाक भाई बहनों में अक्सर आम होता है लेकिन बाहर वालों के ताने मैं इतना सुन चुकी थी कि मुझे लगता था हां हो सकता है कि मैं इनकी अपनी बच्ची हूँ ही नहीं। यह सभी बातें मजाक से ही शुरू होती हैं, लेकिन तारा या मेरी जैसी बच्चीयों को यह मजाक समझ नहीं आते बड़ों को तो आते हैं ना।

मंदिरा की पोस्ट पर कमेंट करने वाला वो ट्रोलर ना सिर्फ मंदिरा और बच्ची का मजाक बना रहा था बल्कि नीचे तबके के, पिछड़े समुदायों को भी निशाने पर लें रहा था।

मंदिर आपने एक इंटरव्यू में बताती हैं, ट्रोलर की बातों से उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता वो इस मुकाम से बहुत आगे बढ़ चुकी हैं। लेकिन जब बात मेरे परिवार मेरे बच्चों की आएगी सिर्फ मुझे फर्क ही नहीं पड़ेगा मैं इसका जवाब भी दूंगी।

बच्चों को अडॉप्ट करना कितना पॉपुलर है हमारे देश में या कितना कॉमन है? अपने अगल-बगल देखिए कितने बच्चे हैं जो अडॉप्ट किए गए हैं आपको समझ जाएंगे कि अडोप्शन की कितना कॉमन है।

ऐसे में जब मंदिरा जैसे लोग सामने आ कर एक आदर्श उदाहरण बनने की कोशिश करते हैं तो उनकी तारीफ करने की जगह उन्हें शुभकामनाएं देने की जगह हम करते वही हैं जो हम सदियों से करते आ रहे हैं उन्हें नीचा दिखाना, बेवजह की टिप्पणियां करना। तो मंदिरा की जगह और आम औरत भी होती तो वो यही करती जो उन्होंने किया।

मैं और mummyandrumi.com की टीम मंदिरा को और उनके परिवार वालों को तारा के लिए बहुत शुभकामनायें देते हैं।

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